बैठा इबादत में तेरी, वोह कब से दिल लगाये;
हो उसकी भी दुआ कुबूल, अल्लाह किसी को ना यु तरसाये। !!!
कोई उसका भी हाथ थामे, कोई उस से भी दिल लगाये;
ज़िंदगी चाहे अकेली हो , मगर अकेलापन किसी को ना खानेपाये !!
रास्ते चाहे जैसे भी हो , हर कोई अपनी मंज़िल ढूंढ पाये;
हो सके तो खुदा मेरे , सबकी किस्मत एक जैसी बनाये !!!
हो उसकी भी दुआ कुबूल, अल्लाह किसी को ना यु तरसाये। !!!
कोई उसका भी हाथ थामे, कोई उस से भी दिल लगाये;
ज़िंदगी चाहे अकेली हो , मगर अकेलापन किसी को ना खानेपाये !!
रास्ते चाहे जैसे भी हो , हर कोई अपनी मंज़िल ढूंढ पाये;
हो सके तो खुदा मेरे , सबकी किस्मत एक जैसी बनाये !!!