मेरे शहर में; मैं एक अजनाबी बन कर रह गया,
इ-खुदा एस प्यार में; मैं एक हासी बन कर रह गया..
रोये तो वोह थे; जो मिलने आये मुझे मेरी मौत पर,
मैं मेरी मौत पर भी चुप्पी साधे रह गया..
कह न पाया उन्हें मैं; प्यार के दो शब्द भी,
साडी जिन्दगी मैं न जाने; क्या कहता रह गया..
देख कर मुझे वोह; रो दिए एक बार फिर,
एक बार फिर उन आसुयो में; प्यार मेरा बह गया..
मेरे शहर में; मैं एक अजनाबी बन कर रह गया,
इ खुदा एस प्यार में; मैं एक हासी बन कर रह गया..
थे खड़े व्हो पास मेरे; दूर लगते थे बहुत,
एस पास दूर की कश-म-कश में; मैं वही खड़ा रह गया..
पास जाने की तमन्ना; जब कभी दिल में हुई,
हर तमन्ना को मैं; सीने में दफ़न करता रह गया..
जान-न चाहते थे; उनकी चाहत भी हो कुछ,
एस जान-ने की चाहतो में; मैं आपनी चाहत से रह गया..
होने लगे जब दूर वोह; रोक सका न उनको हम,
गेरो की हासी में; आपने आसू दबाता रह गया..
मेरे शहर में; मैं एक अजनाबी बन कर रह गया,
इ खुदा एस प्यार में; मैं एक हासी बन कर रह गया..
3 comments:
good one...
Thanx Amit ...
Good Motu :)
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