Friday, 16 April 2010

मेरे शहर में; मैं एक अजनाबी बन कर रह गया

मेरे शहर में; मैं एक अजनाबी बन कर रह गया,
-खुदा एस प्यार में; मैं एक हासी बन कर रह गया..
रोये तो वोह थे; जो मिलने आये मुझे मेरी मौत पर,
मैं मेरी मौत पर भी चुप्पी साधे रह गया..
कह पाया उन्हें मैं; प्यार के दो शब्द भी,
साडी जिन्दगी मैं जाने; क्या कहता रह गया..
देख कर मुझे वोह; रो दिए एक बार फिर,
एक बार फिर उन आसुयो में; प्यार मेरा बह गया..

मेरे शहर में; मैं एक अजनाबी बन कर रह गया,
खुदा एस प्यार में; मैं एक हासी बन कर रह गया..

थे खड़े व्हो पास मेरे; दूर लगते थे बहुत,
एस पास दूर की कश--कश में; मैं वही खड़ा रह गया..
पास जाने की तमन्ना; जब कभी दिल में हुई,
हर तमन्ना को मैं; सीने में दफ़न करता रह गया..
जान- चाहते थे; उनकी चाहत भी हो कुछ,
एस जान-ने की चाहतो में; मैं आपनी चाहत से रह गया..
होने लगे जब दूर वोह; रोक सका उनको हम,
गेरो की हासी में; आपने आसू दबाता रह गया..

मेरे शहर में; मैं एक अजनाबी बन कर रह गया,
खुदा एस प्यार में; मैं एक हासी बन कर रह गया..

3 comments:

Unknown said...

good one...

Nitesh Menghani said...

Thanx Amit ...

Tech Talk said...

Good Motu :)