खुद हे की आदत जाती नहीं, और दुर रेहने की बात करतें है;
हर पल में महसूस किया हे हमे, फिर भी साथ देने से डरा करतें है ....
देखते हे हर रोज़ हमे, बात करने का बहाना धुन्द्ते है;
पास आना भी है, और फिर दूर जाना भी चाहते है ....
इस दिल-ओ-दिमाग की कश-म-कश में, कही खों ना दो तुम हमे;
फिर खुद से पुछा करोगे, क्या चाहते थे और क्या किया करतें है....
हर पल में महसूस किया हे हमे, फिर भी साथ देने से डरा करतें है ....
देखते हे हर रोज़ हमे, बात करने का बहाना धुन्द्ते है;
पास आना भी है, और फिर दूर जाना भी चाहते है ....
इस दिल-ओ-दिमाग की कश-म-कश में, कही खों ना दो तुम हमे;
फिर खुद से पुछा करोगे, क्या चाहते थे और क्या किया करतें है....
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