आसमान आज कुछ साफ़ नजर आता है
रोया बहुत है, फिर भी निराश नजर आता है
झलकी जो बूंदे कही, कभी आसू तो कभी पानी कहा हमने
न जाने इंसान एन लावाजो को क्यों नहीं समझ पता है
ले चले थे हम हथेली में, लकीरे एक सी
फिर भी दुनिया में कोई कही तो कोई कही बिखर जाता है
सिखा था हमने प्यार सबके दिल को जोड़ता है
तो फिर क्यों हर आशिक प्यार में टूटता नजर आता है
देखा किया हम बहुत ज़माने को
फिर भी हर रोज़ एक नया राग उभर आता है
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